फिल्म में गांधी परिवार से भी शक्तिशाली सरदार मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का रोल अनुपम खेर, पत्रकार संजय बारु का रोल अक्षय खन्ना, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी सुजैन बर्नर्ट, राहुल गांधी अर्जुन माथुर,प्रियंका गांधी का किरदार आहना कुमरा ने निभाया है। इस फिल्म का निर्देशन विजय रत्नाकर गुट्टे ने किया है। इस फिल्म की अवधि एक घंटा 52 मिनट की है।

पद ग्रहण करने के साथ ही पीएम की चाल अलग
पीएम सिंह का पद ग्रहण करते ही कांग्रेस हाईकमान का टकराव व अलग रास्ते दिखाए गए हैं जहां सिंह को पीएम पद मात्र दिखावा कहा जाता था वहीं यह फिल्म पीएम सिंह की इमेज को सुधार रही हैं वहीं गांधी परिवार की फजीहत भी कर रही है। विरोधियों का सामना जैसे कई दृश्यों के बाद कहानी उस मोड़ तक पहुंचती है, जहां न्यूक्लियर मुद्दे पर पीएम इस्तीफा देने पर आमादा हो जाते हैं पर हाईकमान उनको इस्तीफा देने से रोक लेती है।
11 जनवरी को रिलीज हुई बालीबुड की हिंदी फिल्म द एक्सीडेंटल प्राईम मनिस्टर को देखने के लिए सिनेमा घरों में ाूब भीड़ जुट रही है। इस फिल्म को पत्रकार संजय बारु की लिखी किताब द एक्सीडेंटल प्राईम मनिस्टर पर फिल्माया गया है। इस फिल्म को देखकर वहीं लोग मनोरंजन कर सकते हैं जिनकी राजनीतिक सूझबूझ अच्छी है क्योंकि राजनीतिक सूझबूझ न रखने वाला इस फिल्म में मात्र तीन ही किरदारों को पहचान पाएगा जिसमें सरदार मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी व राहुल गांधी इसके अलावा फिल्म में अहम रोल निभा रहे लोगों की पहचान करना बहुत ही मुश्किल है जिसके कारण समान्य दर्शक वोर ही होंगे। फिल्म में सीधे तौर पर सरदार मनमोहन सिहं को किंग बताकर पेश किया गया है। 2004 लोकसभा के चुनावों का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही प्रधानमंत्री की कुर्सी को मची खलवली से फिल्म की शुरुआत हुई है। इसके बाद सोनिया के घर पर कांग्रेस के दिग्गजों की बैठक और कई नामों पर चर्चा, मिडिया के वयानों में सोनिया के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा से लेकर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनने तक इंट्रों में पेश किया है। प्रधानमंत्री के शपथ समारोह से फिल्म असली मायने में शुरु होती है। इसी शपथ ग्रहण समारोह में बतौर संजय बारु भी शिरकत करते हैं। जहां उन्हें खबर के लिए अपने सोर्स से बात करते हुए पिल्माया गया है। फिल्म में पहला सीन ही वित्त मंत्री की चर्चा को लेकर शुुरु होता है। जोकि काफी रोचक है। इसके बाद एक सीन फिल्म में सरदार मनमोहन सिंह का बतौर फाईनेंस मिनिस्टर संजय बारु से बातचीत का दिखाया गया है। इसके बाद पीएमओं में अपने प्रधानमंत्री पद ग्रहण करते हुए पीएम मनमोहन सिंह के स्कूल से प्रधानमंत्री बनने के सफर की झलङ्क्षकया भी दिखाई गई हैं। कुर्सी संभालने के बाद संजय बारु को पीएम ने अपना प्रैस सचिव बनने के लिए आफर किया जहां बारु ने कहा कि अब जमाना बदल गया है मैं आपका मिडिया सलाहकार बनना पंसद करुंगा। लेकिन इसमें बारु ने दो शर्तंे रख कर ही पद ग्रहण करने की बात कही। जिसमें अहम व महत्वपूर्ण थी कि मैं सिर्फ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ही रिपोर्ट कंरुगा। उसके बाद संजय बारु ने अगले चार साल तक अपना काम बखूबी निभाया और प्रधानमंत्री के चरित्र को असल से ाी ज्यादा बढिय़ा मिडिया व देश के सामने पेश किया। फिल्म में टी ब्रेक होने तक पीएम की पहली टर्म दिखाई है व इंटरवल के बाद दूसरी टर्म 2014 तक दर्शाई गई हैं। पहले भाग में प्रधानमंत्री मनमोहन का ऐतिहासिक निर्णय न्यकलीयर डील को प्रमुख रुप सें पेश किया है। इसी तरह दूसरे भाग में प्रधानमंत्री व कांग्रेस के पतन की पूरी दास्तां व घोटालों का जिक्र किया है।
फिल्म में इन लोगों ने किए है रोल
फिल्म में इन लोगों ने किए है रोल
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का रोल अनुपम खेर, पत्रकार संजय बारु का रोल अक्षय खन्ना, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी सुजैन बर्नर्ट, राहुल गांधी अर्जुन माथुर,प्रियंका गांधी का किरदार आहना कुमरा ने निभाया है। इस फिल्म का निर्देशन विजय रत्नाकर गुट्टे ने किया है। इस फिल्म की अवधि एक घंटा 52 मिनट की है।
पद ग्रहण करने के साथ ही पीएम की चाल अलग
पीएम सिंह का पद ग्रहण करते ही कांग्रेस हाईकमान का टकराव व अलग रास्ते दिखाए गए हैं जहां सिंह को पीएम पद मात्र दिखावा कहा जाता था वहीं यह फिल्म पीएम सिंह की इमेज को सुधार रही हैं वहीं गांधी परिवार की फजीहत भी कर रही है। विरोधियों का सामना जैसे कई दृश्यों के बाद कहानी उस मोड़ तक पहुंचती है, जहां न्यूक्लियर मुद्दे पर पीएम इस्तीफा देने पर आमादा हो जाते हैं पर हाईकमान उनको इस्तीफा देने से रोक लेती है।
No comments:
Post a Comment