Tuesday, 15 January 2019

द एक्सीडेंटल प्राईम मनिस्टर में सिंग इज किंग

फिल्म में गांधी परिवार से भी शक्तिशाली सरदार मनमोहन सिंह
 11 जनवरी को रिलीज हुई बालीबुड की हिंदी फिल्म द एक्सीडेंटल प्राईम मनिस्टर को देखने के लिए सिनेमा घरों में ाूब भीड़ जुट रही है। इस फिल्म को पत्रकार संजय बारु की लिखी किताब द एक्सीडेंटल प्राईम मनिस्टर पर फिल्माया गया है।  इस फिल्म को देखकर वहीं लोग मनोरंजन कर सकते हैं जिनकी राजनीतिक सूझबूझ अच्छी है क्योंकि राजनीतिक सूझबूझ न रखने वाला इस फिल्म में मात्र तीन ही किरदारों को पहचान पाएगा जिसमें सरदार मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी व राहुल गांधी इसके अलावा फिल्म में अहम रोल निभा रहे लोगों की पहचान करना बहुत ही मुश्किल है जिसके कारण समान्य दर्शक वोर ही होंगे।  फिल्म में सीधे तौर पर सरदार मनमोहन सिहं को किंग बताकर पेश किया गया है। 2004 लोकसभा के चुनावों का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही प्रधानमंत्री की कुर्सी को मची खलवली से फिल्म की शुरुआत हुई है। इसके बाद सोनिया के घर पर  कांग्रेस के दिग्गजों की बैठक और कई नामों पर चर्चा, मिडिया के वयानों में सोनिया के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा से लेकर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनने तक इंट्रों में पेश किया है।  प्रधानमंत्री के शपथ समारोह से फिल्म असली मायने में शुरु होती है। इसी शपथ ग्रहण समारोह में बतौर संजय बारु भी शिरकत करते हैं। जहां उन्हें खबर के लिए अपने सोर्स से बात करते हुए पिल्माया गया है। फिल्म में पहला सीन ही वित्त मंत्री की चर्चा को लेकर शुुरु होता है। जोकि काफी रोचक है। इसके बाद एक सीन फिल्म में सरदार मनमोहन सिंह का बतौर फाईनेंस मिनिस्टर संजय बारु से बातचीत का दिखाया गया है। इसके बाद पीएमओं में अपने प्रधानमंत्री पद ग्रहण करते हुए पीएम मनमोहन सिंह के स्कूल से प्रधानमंत्री बनने के सफर की झलङ्क्षकया भी दिखाई गई हैं। कुर्सी संभालने के बाद संजय बारु को पीएम ने अपना प्रैस सचिव बनने के लिए आफर किया जहां बारु ने कहा कि अब जमाना बदल गया है मैं आपका मिडिया सलाहकार बनना पंसद करुंगा। लेकिन इसमें बारु ने दो शर्तंे रख कर ही पद ग्रहण करने की बात कही। जिसमें अहम व महत्वपूर्ण थी कि  मैं सिर्फ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ही रिपोर्ट कंरुगा। उसके बाद संजय बारु ने अगले चार साल तक अपना काम बखूबी निभाया और प्रधानमंत्री के चरित्र को असल से ाी ज्यादा बढिय़ा मिडिया व देश के सामने पेश किया। फिल्म में टी ब्रेक होने तक पीएम की पहली टर्म दिखाई है व इंटरवल के बाद दूसरी टर्म 2014 तक दर्शाई गई हैं। पहले भाग में प्रधानमंत्री मनमोहन का ऐतिहासिक निर्णय न्यकलीयर डील को प्रमुख रुप सें पेश किया है। इसी तरह दूसरे भाग में प्रधानमंत्री व कांग्रेस के पतन की पूरी दास्तां व घोटालों का जिक्र किया है। 

फिल्म में इन लोगों ने किए है रोल

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का रोल अनुपम खेर, पत्रकार संजय बारु का रोल अक्षय खन्ना, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी सुजैन बर्नर्ट, राहुल गांधी अर्जुन माथुर,प्रियंका गांधी का किरदार आहना कुमरा ने निभाया है। इस फिल्म का निर्देशन विजय रत्नाकर गुट्टे ने किया है। इस फिल्म की अवधि एक घंटा 52 मिनट की है। 


पद ग्रहण करने के साथ ही पीएम की चाल अलग
पीएम सिंह का पद ग्रहण करते ही कांग्रेस हाईकमान का टकराव व अलग रास्ते दिखाए गए हैं जहां सिंह को पीएम पद मात्र दिखावा कहा जाता था वहीं यह फिल्म पीएम सिंह की इमेज को सुधार रही हैं वहीं गांधी परिवार की फजीहत भी कर रही है।  विरोधियों का सामना जैसे कई दृश्यों के बाद कहानी उस मोड़ तक पहुंचती है, जहां न्यूक्लियर मुद्दे पर पीएम इस्तीफा देने पर आमादा हो जाते हैं पर हाईकमान उनको इस्तीफा देने से रोक लेती है।

Thursday, 10 January 2019

हिमाचल कांग्रेस में हुआ बड़ा बदलाब



हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी को वीरवार को नया अध्यक्ष मिल गया है। कांग्रेस हाईकमान ने कुलदीप राठौर को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी है। अखिल भरतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है। पिछले काफी समय से सुखविंदर सिंह सुक्खू और वीरभद्र सिंह के बीच अन वन चल रही थी, वीरभद्र किसी भी सार्वजनिक मंच से पूर्व अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू का विरोध करते हुए गुरेज नहीं करते थे। लेकिन पिछले सप्ताह वीरभद्र सिंह व सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोलन में एक ही मंच पर बैठकर वार्तालाप की थी। अब कांग्रेस हाई कमान ने सुखविंदर सिंह सुक्खू  को हटाकर पेशे से वकील व वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलदीप राठौर  के नाम पर मोहर लगा दी है। कांग्रेस में चल रही अंतर कला भी इस नियुक्ति के बाद समाप्त हो जाएगी। साथ ही वीरभद्र खेमा भी नई ऊर्जा के साथ लोकसभा चुनावों के लिए मैदान में उतरेगा। माना यह जाता है कि वीरभद्र सिंह व कुलदीप राठौर के रिश्ते पूर्व में अच्छे नहीं रहे हैं लेकिन वर्तमान में वीरभद्र सिंह ने राठौर के नाम पर सहमति जताई थी। कुलदीप राठौर ठियोग के रहने वाले हैं। राठौर को पूर्व में विद्या स्टोक्स के सबसे करीबियों के रूप में जाना जाता था। राठौर कॉलेज में से ही एनएसयूआई के साथ जुड़कर संगठन के लिए कार्य कर रहे हैं।इतना ही नहीं राठौर कई बाहरी राज्यों में भी संगठन के लिए काम कर चुके हैं। वर्तमान में राठौर हाई कोर्ट शिमला में बकालत करने के साथ कांग्रेस प्रदेश सचिव का कार्यभार देखते है।


वीरवार को राजधानी दिल्ली में देशभर के कांग्रेस अध्यक्षों के उपाध्यक्षो की बैठक एके एंटनी की अगुवाई में आयोजित की गई। जिसमें यह अहम फैसला किया गया। बता दे कि सुखविंदर सिंह सुक्खू 2016 में अपना कार्यकाल पूरा कर चुके थे। इसी बैठक के बाद ये खबर आ रही है। इस बैठक में सुखु भी दिल्ली में मौजूद रहे।
ये भी थे अध्यक्ष की दौड़ में
राठौर के अलावा पंजाब कांग्रेस प्रभारी व विधायक डलहौजी आशा कुमारी, शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान का नाम भी चल रहा था लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने कुलदीप राठौर के नाम पर मोहर लगाई है।
राठौर आनंद शर्मा के माने जाते है करीबी
कुलदीप राठौर छात्र राजनीति से ही संगठन में कार्य कर रहे है। राठौर छात्र राजनीति से ही आनंद शर्मा के करीबी रहे है।

कांगड़ा टी20 टीम को 31 खिलाडी चयनित

ज़िला कांगड़ा सीनियर टी20 क्रिकेट टीम के चयन को लिए गए ट्रायल का वीरवार को रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। ट्रायल में अपने खेल का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में से 31 खिलाड़ियों का चयन कैम्प के लिए किया गया है। 
                                        चयनित खिलाड़ियों का कैम्प 15 जनवरी से एचपीसीए स्टेडियम धर्मशाला में आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण कैम्प में खिलाड़ियों के खेल की बारीकी से परख करने व उनके खेल में निखार लाने की जिम्मेदारी कोच वरुण मल्होत्रा व तिलक राज को दी है। चयनित 31 खिलाड़ियों में से बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में से अंतिम 16 का चयन किया जाएगा। जिसके बाद टीम ज़िला स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरे जिलों की टीमों से भिड़ेगी। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विजय शर्मा ने बताया है कि चयनित खिलाड़ियों को 15 जनवरी को सुबह 10 बजे एचपीसीए स्टेडियम में रिपोर्ट करनी होगी।

ये खिलाड़ी हुए चयनित
1. ऋत्विज कश्यप
2. मणि शर्मा
3. अपूर्व वालिया
4. चाहत मल्होत्रा
5. शौर्य सरण
6. पंकज जसवाल
7. अर्पित गुलेरिया
8. अलश वशिष्ठ
9. आशु शर्मा
10. आयुष शर्मा
11. कर्मण्य वर्मा
12. हर्ष जम्वाल
13. सिदांत डोगरा
14. सुकृत शर्मा
15. ईशान गांधी
16. सिद्धान्त पुरोहित
17. साहिल मंगल
18. अक्ष शर्मा
19. विशाल कौंडल
20. ईशान लखनपाल
21. नितिन कुमार
22. कोलंबस मेहरा
23. अभिषेक सिंह
24. कार्तिक शर्मा
25. अंकुश कुमार
26. सांबव अरोडा
27. कनिष्क पठानिया
28. अप्पारवाल यादव
29. अर्जुन बन्याल
30. गंगन शर्मा
31. मयंक ठाकुर


Thursday, 3 January 2019

सहमति से हुए सेक्स को बलात्कार नहीं कह सकते: सुप्रीम कोर्ट

भारतीय सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर लिव-इन रिलेशनशिप में पुरुष और महिला के बीच सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बने और बाद में पुरुष शादी से मुक़र जाता है तो इसे बलात्कार नहीं कहा जा सकता है। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस गंभीर मुद्दे पर फ़ैसला बुधवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए दिया। महाराष्ट्र की एक नर्स ने अपने लिव-इन पार्टनर पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए एफ़आईआर कराई थी। 
क्या है पूरा मामला
 महाराष्ट्र राज्य के एक प्राइवेट मेडिकल इंस्टीट्यूट में शिकायतकर्ता नर्स  और  आरोपी डॉक्टर काम करते थे। जहां दोनों के रिश्ते में करीब आए और एक-दूसरे से प्यार हो गया । जिसके बाद दोनों साथ रहने लगे।
पीड़िता नर्स ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ़ ये कहकर एफ़आईआर दर्ज़ करवाई कि उक्त आरोपी ने शादी का वादा करके शारीरिक सम्बन्ध बनाए थे लेकिन बाद में किसी और महिला से शादी कर ली। पीड़ित नर्स द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर का सेशन कोर्ट में ट्रायल चला। इसके बाद आरोपी डाक्टर ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपने ख़िलाफ़ हुई एफ़आईआर रद्द करने के लिए याचिका दायर की। लेकिन कोर्ट ने डॉक्टर की दलीलों को खारिज़ कर दिया और एफ़आईआर बरकरार रखी, जिसके तहत आरोपी डाक्टर की कभी भी  गिरफ्तारी हो सकती थी। जिसके बाद आरोपी डॉक्टर ने 2018 के मध्य में इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जहां जस्टिस एके सीकरी और एस अब्दुल नज़ीर की खंडपीठ ने फ़ैसला आरोपी डॉक्टर के पक्ष में दिया। 

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
बलात्कार और सहमति से सेक्स के बीच अंतर है। लिव इन पार्टनर्स अगर किन्हीं कारणों से शादी नहीं कर पाते हैं तो महिला बलात्कार का मामला नहीं चला सकती है। वर्तमान समय में रेप के अधिकतर मामले झूठे साबित हो रहे हैं नौकरी पेशा लोगों पर झूठे रेप के आरोप लगाकर कई महिलाएं पता कर रही हैं हालांकि इस मामले पर नीचे के न्यायालय में भी फैसले सुनाए जा चुके हैं लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद महिलाओं द्वारा पुरुषों को बदनाम करने के लिए लगाए जाने वाले झूठे आरोपों में भी कमी आएगी।

ब्रेकिंग:- कांगड़ा की सीमाओं को चोरी छुपे लांघने पर केस दर्ज

प्रदेश के सबसे बड़े ज़िला कांगड़ा की तहसील परागपुर के पुलिस थाना रक्कड़ के तहत आने वाले बन्नी गाँव के एक व्यक्ति पर चोरी छिपे लुधिया...